किसानों की आमदनी बढ़ाने पर फोकस, Shivraj Singh Chouhan बोले- यही सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता

नई दिल्ली
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने लोकसभा में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसानों की आय और सुरक्षा बढ़ाने को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रही है। इसके लिए सरकार कई कदम उठा रही है, जैसे तंबाकू जैसी हानिकारक फसलों की जगह लाभदायक फसलों को बढ़ावा देना, एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद, फसल बीमा योजना में सुधार और सख्त निगरानी व्यवस्था लागू करना।

संसद के निचले सदन में सांसदों द्वारा उठाए गए विभिन्न प्रश्नों का उत्तर देते हुए कृषि मंत्री चौहान ने कहा कि सरकार ने किसानों से तंबाकू की खेती छोड़ने की अपील की है और इसके बदले कई फायदे वाली फसलों की पहचान की है। इनमें हाइब्रिड मक्का, मिर्च, शकरकंद, कपास, आलू, चिया, फीड बीन्स, लोबिया, रागी, अरहर, गन्ना, सोयाबीन, ज्वार और मूंगफली जैसी फसलें शामिल हैं, ताकि किसानों की नकद आय सुरक्षित बनी रहे।

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 मंत्री ने कहा कि देश के ज्यादातर किसानों के पास छोटी जमीन होती है, इसलिए केवल एक ही फसल पर निर्भर रहना जोखिम भरा होता है। इसको देखते हुए सरकार ने इंटीग्रेटेड फार्मिंग (मिश्रित खेती) के कई मॉडल तैयार किए हैं, जिनका अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शन भी किया जा रहा है। इन मॉडलों के तहत किसान अनाज (गेहूं और धान), सब्जियां, फल, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन, बकरी पालन और एग्रो-फॉरेस्ट्री जैसी गतिविधियों को एक साथ अपना सकते हैं। इससे उन्हें पूरे साल स्थिर और ज्यादा आय मिल सकती है।

चौहान ने आगे बताया कि किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) बढ़ाया गया है और इस सीजन में एमएसपी पर रिकॉर्ड खरीद की जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने दालों जैसे तूर, मसूर और उड़द के लिए भी व्यवस्था की है, जिसमें किसान रजिस्ट्रेशन के बाद अपनी पूरी उपज बेच सकते हैं और सरकार उसे खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। इससे दाल उत्पादक किसानों को बड़ा सहारा मिला है।

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फसल बीमा योजना को लेकर उन्होंने कहा कि पहले किसानों को मुआवजा पाने में कई महीने लग जाते थे, लेकिन अब नियमों में बदलाव कर दिया गया है, जिससे अगर किसी एक किसान की फसल भी खराब होती है तो उसे मुआवजा मिलना जरूरी होगा। उन्होंने यह भी बताया कि अगर 21 दिनों के भीतर बीमा राशि किसान के खाते में नहीं आती है, तो बीमा कंपनी और राज्य सरकार को 12 प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान करना होगा। इससे किसानों को देरी का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।

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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त है और फसल बीमा या अन्य योजनाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने बताया कि कृषि रक्षक पोर्टल जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए प्राप्त शिकायतों की गंभीरता से जांच की जा रही है और जहां भी अनियमितता पाई जाती है, वहां दोषियों पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि हाल के वर्षों में राजस्थान सहित कई राज्यों में फसल बीमा के तहत हजारों करोड़ रुपए सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के जरिए भेजे गए हैं, जिससे किसानों को सीधा फायदा मिला है।

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